कुछ दिनों पहले अनोखा वाक़्या हुआ..एक बंदर ने कैसे अपने साथी बंदर को दी नयी ज़िंदगी..कमाल है !!
यह कानपूर स्टेशन का मंज़र था 'कि कैसे उसने उसे मरने के लिए न छोड़ कर अपनी कोशिश से एक अजूबा कर दिया..मिल गयी नयी ज़िंदगी उसको.. जबकि इंसान सिर्फ सड़क पर मरने वाले को यूँ ही तमाशबीन बनकर देखते हुए अपनी मंज़िल की तरफ बढ़ जाते हैं।
आज शेर भी इन्सानी मोहब्बत से मुत्तासिर होकर उसे अपना हमदर्द और दोस्त मानने में ज़रा सी भी कंजूसी नहीं करते है। इस प्यार के आगे वो अपनी कुदरती बखशी हुई आदमखोर आदत को भी छोड़ने को तैयार हो जाता है और इंसान से रिश्ता जोड़ लेता है।
इतना बड़ा बदलाव खूंखार जानवर अपने अंदर ला सकता है फिर हम इंसान-तरक्की याफ़्ता दिमाग़ वाला..होकर भी नफरतों के अंधे कुँए में क्यों गिरते जा रहे हैं ??
ये दुनिया एक बगीचा है यह तभी खूबसूरत बनता है जब इसके हर फूल को उसका माली एक नज़र से देखता है और उसे सींचता है एक जैसी फिक्र करता है।
खुदा ने हमें दिमाग़ देकर इस दुनिया में भेजा है जिसका भरपूर इस्तेमाल कर हम अच्छे -बुरे की पहचान कर सके.. फिर भी आज मुट्ठी भर लोग इतनी बड़ी दुनिया को अपने दिमाग़ से सोचने पर हमें क्यों मजूबर कर रहे है.. और तबाही का रास्ता आने वाले समय को देना चाहते है -हम इतने दिमाग़ी ग़ुलाम क्यों बनते जा रहे है.. कि हर चीज़ को उनके चंशमे से देख रहे है.. अपने दिमाग को आराम दे रहे है।
क्यों हम बिना सोचे समझे दूसरे की बात..से मुतास्सिर हो जाते है जैसे खुदा का फरमान है और क़ुबूल करना ज़रूरी है।
हम इंसान हैं -ज़ागीर नहीं हैं जो भी जैसे चाहें इस्तेमाल करे.. हम पैदा हुए हैं सबसे ज़ायदा ताकवर दिमाग़ के साथ.. इसलिए हम किसी की कटपुतली नहीं हैं -.. हम तो दुनिया में आए हैं मोहब्बत का पैग़ाम ले कर..
यह कानपूर स्टेशन का मंज़र था 'कि कैसे उसने उसे मरने के लिए न छोड़ कर अपनी कोशिश से एक अजूबा कर दिया..मिल गयी नयी ज़िंदगी उसको.. जबकि इंसान सिर्फ सड़क पर मरने वाले को यूँ ही तमाशबीन बनकर देखते हुए अपनी मंज़िल की तरफ बढ़ जाते हैं।
आज शेर भी इन्सानी मोहब्बत से मुत्तासिर होकर उसे अपना हमदर्द और दोस्त मानने में ज़रा सी भी कंजूसी नहीं करते है। इस प्यार के आगे वो अपनी कुदरती बखशी हुई आदमखोर आदत को भी छोड़ने को तैयार हो जाता है और इंसान से रिश्ता जोड़ लेता है।
इतना बड़ा बदलाव खूंखार जानवर अपने अंदर ला सकता है फिर हम इंसान-तरक्की याफ़्ता दिमाग़ वाला..होकर भी नफरतों के अंधे कुँए में क्यों गिरते जा रहे हैं ??
ये दुनिया एक बगीचा है यह तभी खूबसूरत बनता है जब इसके हर फूल को उसका माली एक नज़र से देखता है और उसे सींचता है एक जैसी फिक्र करता है।
खुदा ने हमें दिमाग़ देकर इस दुनिया में भेजा है जिसका भरपूर इस्तेमाल कर हम अच्छे -बुरे की पहचान कर सके.. फिर भी आज मुट्ठी भर लोग इतनी बड़ी दुनिया को अपने दिमाग़ से सोचने पर हमें क्यों मजूबर कर रहे है.. और तबाही का रास्ता आने वाले समय को देना चाहते है -हम इतने दिमाग़ी ग़ुलाम क्यों बनते जा रहे है.. कि हर चीज़ को उनके चंशमे से देख रहे है.. अपने दिमाग को आराम दे रहे है।
क्यों हम बिना सोचे समझे दूसरे की बात..से मुतास्सिर हो जाते है जैसे खुदा का फरमान है और क़ुबूल करना ज़रूरी है।
हम इंसान हैं -ज़ागीर नहीं हैं जो भी जैसे चाहें इस्तेमाल करे.. हम पैदा हुए हैं सबसे ज़ायदा ताकवर दिमाग़ के साथ.. इसलिए हम किसी की कटपुतली नहीं हैं -.. हम तो दुनिया में आए हैं मोहब्बत का पैग़ाम ले कर..


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